Home देश एकजुटता की कमी पड़ी भारी, विपक्षी फूट ने BJP-शिंदे गुट की खोली...

एकजुटता की कमी पड़ी भारी, विपक्षी फूट ने BJP-शिंदे गुट की खोली जीत की राह

11
0
Jeevan Ayurveda

मुंबई
मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों के नतीजों के विश्लेषण से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। विपक्षी दलों उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना (UBT) और कांग्रेस के बीच गठबंधन टूटने का सीधा फायदा सत्ताधारी भाजपा और एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना को मिला है। आंकड़ों के अनुसार, कम से कम 32 वार्डों में विपक्षी मतों के विभाजन के कारण महायुति की राह आसान हो गई।

महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग (SEC) द्वारा जारी उम्मीदवार-वार मतदान डेटा के विश्लेषण से पता चलता है कि बिखरे हुए विपक्ष के कारण भाजपा 21 वार्डों में जीत दर्ज की है। शिंदे की शिवसेना को 10 वार्डों में जीत हासिल हुई है। वहीं, अजीत पवार की NCP को सिर्फ एक वार्ड में लाभ मिला है।

Ad

गठबंधन का गणित और फ्रेंडली फाइट
चुनाव से पहले उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस का साथ छोड़कर अपने चचेरे भाई राज ठाकरे (MNS) के साथ गठबंधन किया था। इसके जवाब में कांग्रेस ने प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) के साथ हाथ मिलाया। दो वार्डों (173 और 225) में तो स्थिति और भी खराब रही, जहां शिवसेना (UBT) के उम्मीदवारों को बीजेपी से हार का सामना करना पड़ा क्योंकि शिंदे गुट के साथ 'फ्रेंडली फाइट' के चलते विपक्षी वोट बंट गए।

इन वार्डों में बिगड़ा खेल
आपको बता दें कि मुंबई की दहिसर (पश्चिम) सीट से शिवसेना (शिंदे) की रेखा यादव ने जीत दर्ज की। कांग्रेस उम्मीदवार को यहां 5,070 वोट मिले। इसी सीट पर शिवसेना (UBT) को 4,314 वोट मिले। जिससे शिंदे सेना 2,474 वोटों से जीत गई। अंधेरी (पश्चिम) का भी यही हाल देखने को मिला। भाजपा के उम्मीदवार रूपेश सावरकर ने जीत दर्ज की है। यहां शिवसेना (UBT) को 8,655 वोट प्राप्त हुए। कांग्रेस ने इस वार्ड में 4,380 वोट काटे। बीजेपी मात्र 538 वोटों से जीती।

घाटकोपर की बात करें तो अश्विनी माटे (BJP) ने जीत दर्ज की। यहां एमएनएस को 6,793 वोट मिले। कांग्रेस ने 6,467 वोट हासिल किए, जिससे विपक्ष हार गया। मानखुर्द और धारावी जैसे इलाकों में भी विपक्षी फूट का असर दिखा। मानखुर्द (वार्ड 135) में बीजेपी ने AIMIM और शिवसेना UBT के बीच बराबर वोट बंटने का फायदा उठाकर जीत हासिल की।

उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस को 24 सीटें जीतने पर बधाई दी, लेकिन गठबंधन टूटने के नुकसान पर चुप्पी साधे रखी। उन्होंने बस इतना कहा, "राजनीति में अगर-मगर पर बात नहीं की जा सकती।" उनके खेमे का मानना है कि 'मराठी वोट' एकजुट करने के लिए मनसे के साथ जाना जरूरी था।

मुंबई कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत का रुख इसके विपरीत है। सचिन सावंत ने कहा, "अगर गठबंधन बरकरार रहता तो नतीजे अलग होते। लेकिन उद्धव जी ने राज ठाकरे के साथ जाने का फैसला किया। हमारे लिए ठाकरे भाइयों के साथ जाना संभव नहीं था।" उन्होंने स्वतंत्र चुनाव लड़ने के फैसले को सही ठहराया।

 

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here