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भारत की भूमिका अहम? नेतन्याहू के ‘हेक्सागन एलायंस’ के पीछे क्या है बड़ी रणनीति

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नई दिल्ली  
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार से दो दिनों के आधिकारिक दौरे पर इजरायल जा रहे हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पिछले सप्ताह इस खबर पर मुहर लगाई थी, जिसके बाद भारत ने भी इसकी पुष्टि की है। यहां पीएम मोदी नेतन्याहू और राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग से मुलाकात करेंगे। वहीं इस दौरान उनका 'नेसेट' (इजरायली संसद) को संबोधित करने का भी कार्यक्रम है। दौरे से पहले नेतन्याहू ने भारत और इजरायल के बीच मजबूत रिश्तों पर जोर देते हुए कहा है कि पीएम की यह यात्रा कट्टरपंथी ताकतों के खिलाफ एक नया गठबंधन बनाने में मदद करेगी। नेतन्याहू ने एक नए वैश्विक संगठन ‘हेक्सागन एलायंस’ का जिक्र किया है।

क्या बोले बेंजामिन नेतन्याहू?
नेतन्याहू ने रविवार को कैबिनेट मीटिंग की शुरुआत में इजरायल की संसद का जिक्र करते हुए कहा, "बुधवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां पहुंचेंगे। वह नेसेट में भाषण देंगे।" नेतन्याहू ने दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी की तारीफ की। उन्होंने कहा, "रिश्तों का ताना-बाना और मजबूत हुआ है, और मोदी यहां इसलिए आ रहे हैं ताकि हम इसे और भी मजबूत कर सकें।" नेतन्याहू ने आगे कहा कि इजरायल-भारत धुरी एक बड़े क्षेत्रीय गठबंधन का हिस्सा होगी, जिसे उन्होंने ‘हेक्सागन’ नाम दिया है।

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क्या है हेक्सागन एलायंस?
‘हेक्सागन ऑफ एलायंस’ छह देशों की एक रणनीतिक समूह होगी, जिसकी पहल नेतन्याहू ने की है। इसका मकसद पश्चिम एशिया और भूमध्यसागर क्षेत्र में आर्थिक, कूटनीतिक और सुरक्षा सहयोग बढ़ाना है। इसे ईरान के प्रभाव और क्षेत्रीय खतरों का जवाब माना जा रहा है। इस प्रस्तावित समूह में इजरायल, भारत, ग्रीस और साइप्रस का नाम लिया गया है। वहीं कुछ अरब और अफ्रीकी देशों का जिक्र किया गया है, लेकिन उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। नेतन्याहू ने कहा कि वे मध्य पूर्व के आसपास या भीतर एक पूरा हेक्सागन गठबंधन बनाना चाहते हैं, जिसमें भारत, अरब देश, अफ्रीकी देश, भूमध्यसागर के देश जैसे ग्रीस और साइप्रस तथा एशिया के कुछ अन्य देश शामिल होंगे, जिनका विवरण वे बाद में देंगे।

क्या मकसद?
नेतन्याहू के मुताबिक इस गठबंधन का मकसद कट्टर धुरियों के खिलाफ समान सोच रखने वाले देशों को एक साथ लाना है। उन्होंने कट्टर ‘शिया धुरी’ के जिक्र के साथ ही उभरती ‘कट्टर सुन्नी धुरी’ का भी उल्लेख किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक नेतन्याहू का यह दांव ‘एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस’ को सीधी चुनौती है।

हालांकि अब तक किसी भी देश ने इस प्रस्ताव को आधिकारिक समर्थन नहीं दिया है। इतना ही नहीं ग्रीस और साइप्रस उसी इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के सदस्य हैं, जिस आईसीसी ने गाजा में युद्ध अपराधों के आरोप में नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। अगर वे इन देशों में जाते हैं तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में नेतन्याहू का सपना अभी दूर है।

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