Home ट्रेंडिंग Stanford-Harvard के टॉपर्स भी बेरोजगार, AI ने बदली नौकरी की पूरी तस्वीर

Stanford-Harvard के टॉपर्स भी बेरोजगार, AI ने बदली नौकरी की पूरी तस्वीर

5
0
Jeevan Ayurveda

हम अक्सर अखबारों और सोशल मीडिया पर चमकीली 'सक्सेस स्टोरी' पढ़ते हैं जहां किसी को करोड़ों का पैकेज मिला या किसी ने एक झटके में बड़ी टेक कंपनी में नौकरी पा ली. लेकिन आज की कहानी सफलता की नहीं, बल्कि उस खौफनाक जमीनी हकीकत की है जो इस वक्त दुनिया के सबसे बड़े एजुकेशन और टेक हब में चल रही है.

फ्रांस के मशहूर अखबार 'Le Monde' में छपी एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज स्टैनफोर्ड और हार्वर्ड से पढ़ने वाले छात्र भी इस समय नौकरियों के लिए दर-दर भटक रहे हैं. सिलिकॉन वैली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दबदबे के कारण अब लाखों रुपये की डिग्रियों के बाद भी नौकरियों की कोई गारंटी नहीं बची है. स्थिति यह है कि रिजेक्शन के डर और भविष्य की अनिश्चितता के कारण ये टॉपर्स अब 'करियर थेरेपी' लेने को मजबूर हो रहे हैं.

Ad

यह सिर्फ अमेरिका की कहानी नहीं है, बल्कि भारत में आईआईटी (IIT), आईआईएम (IIM) और बड़े इंजीनियरिंग-एमबीए कॉलेजों में पढ़ रहे लाखों छात्रों के लिए भी एक बहुत बड़ी चेतावनी है.

सैकड़ों आवेदन, इंटरव्यू तक नहीं और सिर्फ AI जनरेटेड रिजेक्शन
रिपोर्ट में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से इंग्लिश और लिंग्विस्टिक्स की पढ़ाई पूरी करने वाली 23 वर्षीय अमेरिकी छात्रा एलन यांग की कहानी साझा की गई है. एलन का बैकग्राउंड शानदार था, उन्होंने पढ़ाई के दौरान कई टेक कंपनियों में मार्केटिंग का काम भी किया था. उन्हें पूरा भरोसा था कि स्टैनफोर्ड का टैग उनके लिए कॉर्पोरेट जगत के सारे दरवाजे खोल देगा.

लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल जुदा निकली. एलन ने नौकरी के लिए सैकड़ों कंपनियों में आवेदन भेजे, लेकिन उन्हें एक भी इंटरव्यू कॉल नहीं आया. उन्हें जितने भी जवाब मिले, वे सभी 'AI जनरेटेड रिजेक्शन लेटर्स' (यानी इंसानों ने नहीं, बल्कि कंप्यूटर सॉफ्टवेयर ने उनके रेज्यूमे को रिजेक्ट किया था).

एलन बताती हैं कि उनके दोस्तों के ग्रुप में माहौल इतना निराशाजनक और तनावपूर्ण हो गया था कि उन्होंने आपस में एक नियम बना लिया था कि कोई भी एक-दूसरे से नौकरी ढूंढने को लेकर कोई बात नहीं करेगा, क्योंकि इससे हर कोई डिप्रेशन में जा रहा था.

शर्म और डर के मारे थेरेपिस्ट के पास जाने लगे हैं टॉपर्स
दुनिया के सबसे महंगे और बेहतरीन संस्थानों से पढ़ने के बाद भी नौकरी न मिल पाना इन छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहा है. एलन ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि अपनी जिंदगी में पहली बार मुझे थेरेपिस्ट के पास जाना पड़ा. मुझे अपने माता-पिता को यह बताने में बहुत शर्म और डर लग रहा था कि दुनिया के सबसे बेहतरीन कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद भी मेरे पास कोई काम नहीं है. मैंने अपनी पूरी जिंदगी जिस पल का इंतजार किया था, वहां पहुंचकर अचानक सब कुछ शून्य हो गया.

सिलीकॉन वैली में क्यों मच रही है यह तबाही?
Le Monde की रिपोर्ट के मुताबिक, सिलिकॉन वैली में अब वह पुराना उत्साह नहीं बचा है. इसकी मुख्य वजहें ये हैं:

AI के कारण नौकरियों में कटौती: टेक कंपनियों ने तेजी से एआई टूल्स को अपनाना शुरू कर दिया है, जिससे कोडिंग, मार्केटिंग और एंट्री-लेवल (फ्रेशर्स) के कई काम अब मशीनों से ही हो रहे हैं.

हायरिंग पर ब्रेक: सैन फ्रांसिस्को और सिलिकॉन वैली की दिग्गज कंपनियों ने या तो नई भर्तियां पूरी तरह बंद कर दी हैं या फिर बड़े पैमाने पर छंटनी कर रही हैं.

भारतीय छात्रों के लिए इसमें क्या सबक है?
यह रियल स्टोरी भारत के संदर्भ में भी बेहद जरूरी है. पैरेंट्स बच्चों को कोटा या बड़े शहरों में भेजकर लाखों रुपये कोचिंग और कॉलेज की फीस में फूंक देते हैं, इस उम्मीद में कि 'डिग्री' मिलते ही लाइफ सेट हो जाएगी. लेकिन सिलिकॉन वैली का यह संकट आंखें खोलने वाला है.

जब स्टैनफोर्ड और हार्वर्ड जैसे नाम भी अब नौकरी की शत-प्रतिशत गारंटी नहीं हैं. कंपनियों को अब कॉलेज के नाम से ज्यादा इस बात में दिलचस्पी है कि छात्र के पास वास्तविक और व्यावहारिक स्किल्स क्या हैं. पारंपरिक कॉर्पोरेट नौकरियों के सिमटने के कारण अब युवाओं को फ्रीलांसिंग, कंसल्टेंसी और खुद के छोटे स्टार्टअप्स शुरू करने की तरफ ध्यान देना होगा.

सबसे जरूरी बात कि अब एआई से डरने के बजाय छात्रों को 'प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग' और एआई टूल्स को अपने काम में इस्तेमाल करने की कला सीखनी होगी, ताकि वे मार्केट में आउटडेटेड न हों.

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here