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PFI के लीगल एडवाइजर वासिद खान को जमानत देने से हाई कोर्ट का इनकार

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जबलपुर
 मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रतिबंधित संगठन (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) PFI के लीगल एडवाइजर की जमानत याचिका रद्द कर दी है। NIA कोर्ट से जमानत रद्द होने के बाद आरोपी वासिद खान की जमानत के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। NIA ने आरोपी वासिद खान को भोपाल से गिरफ्तार किया था। उस पर भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने वैमनस्यता फैलाने का आरोप है। NIA ने फरवरी 2023 में वासिद खान सहित 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया था।  

कोर्ट ने पाया कि वासिद खान के घर और ऑफिस से आपत्तिजनक सामग्री मिली थी। आरोपी के घर से किताब, सीडी, कंप्यूटर, पेन-ड्राइव, बैंक-अकाउंट, पैम्फलेट, कुछ व्याख्यान जैसी आपत्तिजनक सामग्री मिली थी। जब्त सामग्री से प्रथम दृष्टया पता चलता है कि सोसायटी में सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने का प्रयास किया गया था।

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वासिद खान के खिलाफ क्या आरोप है?

वासिद खान पेशे से वकील है। उसके खिलाफ आरोप है कि वे ऐसी गतिविधियों में शामिल था, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती थीं। वासिद खान की गिरफ्तारी के बाद NIA कोर्ट में अभियोजन पक्ष ने दलील दी थी कि वासिद खान के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं, जिनमें संदिग्ध संदेशों और गतिविधियों के दस्तावेज शामिल हैं।

सबके जिम्मे थे अलग-अलग काम

पीएफआई संगठन में चारों ही आरोपी सक्रिय सदस्य थे। सभी के काम अलग-अलग बंटे हुए थे। गुलाम नबी उर्फ साजिद खान को भोपाल से गिरफ्तार किया गया था। गुलाम नबी इंदौर का रहने वाला है। गुलाम नबी PFI प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल करीम बेकरीवाले का करीबी है। नबी को पीएफआई का फाइनेंस मैनेजर बताया जाता है। गुलाम नबी पर भड़काऊ भाषण देने के भी आरोप हैं।

आरोपी परवेज खान को महाराष्ट्र के औरंगाबाद से गिरफ्तार किया गया था। इसके साथ ही आरोपी वासिद खान पीएफआई की लीगल विंग संभालता था। आरोपी गुलाम रसूल संगठन के कई पदाधिकारियों के संपर्क में था। रसूल पर मध्यप्रदेश में जिहाद के लिए युवाओं को उकसाने का आरोप हैं।

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