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भोपाल लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल का 8वां संस्करण, 9 से 11 जनवरी तक सजेगा विचार और कला का उत्सव

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विचार, साहित्य और कला के उत्सव के लिए सजेगा भोपाल
भोपाल लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल का 8वां संस्करण 9 से 11 जनवरी तक

भोपाल
झीलों की नगरी भोपाल एक बार फिर विचार, साहित्य, कला और संस्कृति के सशक्त संवाद का केंद्र बनने जा रही है। भोपाल लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल (बीएलएफ) 2026 का आठवां संस्करण 9 से 11 जनवरी तक भारत भवन में आयोजित किया जाएगा। इसकी जानकारी फेस्टिवल डायरेक्टर राघव चंद्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी।

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प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चंद्रा ने बताया कि तीन दिनों तक चलने वाला यह फेस्टिवल देश और विदेश के प्रतिष्ठित लेखकों, विचारकों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों को एक मंच पर लाकर गहन वैचारिक संवाद और सांस्कृतिक सहभागिता को नया आयाम देगा। उन्होंने कहा कि यह फेस्टिवल भोपाल को एक सशक्त सांस्कृतिक एवं बौद्धिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। फेस्टिवल के दौरान लेखक संवाद, परिचर्चाएं, पुस्तकों का विमोचन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, कला प्रदर्शनियां तथा विद्यार्थियों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रमों में भारत सहित विभिन्न देशों से आए प्रसिद्ध लेखक, राजनयिक, इतिहासकार, सैन्य अधिकारी, सांसद, कलाकार और शिक्षाविद भाग लेंगे।

फेस्टिवल में लेखक संवाद, परिचर्चाएं, पुस्तक विमोचन, कला प्रदर्शनियां, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विद्यार्थियों के लिए विशेष कार्यक्रम शामिल होंगे। भारत और विदेश से लेखक, इतिहासकार, राजनयिक, सैन्य अधिकारी, कलाकार और शिक्षाविद इसमें सहभागिता करेंगे।

समृद्ध बौद्धिक विमर्श का मंच

फेस्टिवल के अंतर्गत भारत की सभ्यतागत यात्रा, वैश्विक राजनीति और संघर्ष, भारत-चीन संबंध, संवैधानिक मूल्य, तकनीकी शासन प्रणाली, पर्यावरणीय संकट, जनजातीय इतिहास, महिला नेतृत्व, सिनेमा एवं जन-संस्कृति तथा लोकतंत्र के भविष्य जैसे विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी।
इन सत्रों में प्रमुख वक्ताओं के रूप में विलियम डैलरिम्पल, अश्विन सांघी, नीरा चांधोके, साल्वातोरे बाबोनेस, गौतम मुखोपाध्याय, सैयद अकबरुद्दीन, सुजान चिनॉय, अशोक के. कंथा और प्रोबल दासगुप्ता सहभागिता करेंगे।

ट्राइबल आर्ट कैंप एंड फेयर

फेस्टिवल के अंतर्गत भारत भवन द्वारा ट्राइबल आर्ट कैंप एंड फेयर 2026 का आयोजन किया जाएगा, जिसमें 10 राज्यों से 60 से अधिक आदिवासी कलाकार भाग लेंगे। गोंड, बैगा, भील, पिथोरा, वारली और भारिया चित्रकला के साथ बांस, लकड़ी और लोहे के शिल्प प्रदर्शित किए जाएंगे। इस वर्ष गोंडना और मुरिया जैसी दुर्लभ कला परंपराओं पर विशेष ध्यान रहेगा।

युवाओं के लिए विशेष कार्यक्रम

युवा प्रतिभाओं की रचनात्मकता और सांस्कृतिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश स्कूल ऑफ ड्रामा द्वारा विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इसके अलावा ‘यंगरंग’ कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए कहानी-कथन, चित्रकला और कविता प्रतियोगिताएं भी आयोजित होंगी। फेस्टिवल में मंचीय और दृश्य कलाओं को समर्पित अनेक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी, जिनमें दास्तान-ए-गुरु दत्त, काव्यराग—जब कविता संगीत से मिलती है, शाम-ए-कलाम और दास्तान-ए-शंकर शामिल हैं। आधुनिक कला दीर्घा में पद्मश्री दुर्गा बाई व्याम की कलाकृतियों की विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। 

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