Home खेल बेन डकेट और हैरी ब्रूक के फैसले से खड़ा हुआ नया विवाद

बेन डकेट और हैरी ब्रूक के फैसले से खड़ा हुआ नया विवाद

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भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर ने आईपीएल से आखिरी समय पर नाम वापस लेने वाले खिलाड़ियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है. पूर्व भारतीय कप्तान का मानना है कि मौजूदा दो साल के बैन का नियम खिलाड़ियों को नीलामी में चुने जाने के बाद टूर्नामेंट से हटने से रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है.

गावस्कर की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कई बड़े विदेशी खिलाड़ी वर्कलोड मैनेजमेंट या निजी कारणों का हवाला देकर आईपीएल से हट रहे हैं. इस मुद्दे पर विशेष रूप से बात करते हुए गावस्कर ने कहा कि बीसीसीआई को इस मामले में ज्यादा प्रभावी सजा पर विचार करना चाहिए.

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क्या बोले सुनील गावस्कर
सुनील गावस्कर ने कहा, 'इस पर बीसीसीआई को भी सोचने की जरूरत है, क्योंकि दो साल का बैन साफ तौर पर काम नहीं कर रहा है. आपको ऐसी सजा पर विचार करना होगा जिसका खिलाड़ियों पर असर पड़े. जब तक किसी खिलाड़ी के लिए आईपीएल में वापसी की संभावना पर असर नहीं पड़ेगा, तब तक यह नियम कारगर नहीं होगा.'

क्या है आईपीएल का नियम
आईपीएल ने पहले ही एक नियम लागू किया हुआ है, जिसके तहत अगर कोई विदेशी खिलाड़ी नीलामी में चुने जाने के बाद टूर्नामेंट से हटता है, तो उसे दो सीजन तक आईपीएल और भविष्य की नीलामी से बाहर रखा जा सकता है. हालांकि, अगर खिलाड़ी की चोट या मेडिकल कारण सही पाए जाते हैं, तो उसे इस नियम से छूट मिल सकती है. लेकिन हाल के मामलों से यह साफ हो गया है कि यह नियम खिलाड़ियों को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है.

क्यों बढ़ा डकेट के आईपीएल छोड़ने पर विवाद?
Ben Duckett के आईपीएल 2026 से हटने के फैसले ने खिलाड़ी प्रतिबद्धता और लीग नियमों को लेकर बहस को फिर से तेज कर दिया है. इंग्लैंड के इस बल्लेबाज को Delhi Capitals ने 2 करोड़ रुपये में खरीदा था, लेकिन उन्होंने रेड-बॉल क्रिकेट को प्राथमिकता देने और घर पर समय बिताने के लिए टूर्नामेंट से नाम वापस ले लिया.

आईपीएल नियमों के अनुसार, डकेट को अब लीग और भविष्य की नीलामी से दो साल के बैन का सामना करना पड़ सकता है. उनसे पहले Harry Brook भी आईपीएल से हट चुके हैं. उन्हें 6.25 करोड़ रुपये में खरीदा गया था और वह फिलहाल इसी तरह के बैन का सामना कर रहे हैं.
दुनिया भर के बड़े खिलाड़ियों को आकर्षित करने वाले आईपीएल के सामने अब यह चुनौती है कि वह विदेशी खिलाड़ियों की जवाबदेही और प्रतिबद्धता सुनिश्चित करने के लिए अपने नियमों की दोबारा समीक्षा करे.
 

 

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