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छत्तीसगढ़ की संस्कृति का सम्मान: ‘जय जोहार’ के साथ लक्ष्मी वर्मा ने राज्यसभा में ली शपथ

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रायपुर/​नई दिल्ली.

छत्तीसगढ़ से नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने आज देश के गौरवशाली उच्च सदन (राज्यसभा) में सदस्यता की आधिकारिक शपथ ग्रहण की। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने न केवल प्रदेश की तीन करोड़ जनता के अधिकारों की आवाज को सदन में बुलंद करने का संकल्प लिया, बल्कि अपने परिधान के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और अस्मिता को भी राष्ट्रीय पटल पर गरिमामय ढंग से प्रस्तुत किया।

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​शपथ ग्रहण समारोह के दौरान सांसद लक्ष्मी वर्मा ने एक विशेष रूप से डिज़ाइन की गई साड़ी धारण की थी, जिसने संसद भवन में सभी का ध्यान आकर्षित किया। यह परिधान पूर्णतः छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और धरोहर का प्रतिनिधित्व कर रहा था। साड़ी के मुख्य भाग पर प्रदेश के ऐतिहासिक और पुरातात्विक गौरव ‘भोरमदेव मंदिर’ की सुंदर आकृति और प्रदेशवासियों की अगाध आस्था की प्रतीक ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ का भव्य चित्र उकेरा गया था। इसके अतिरिक्त साड़ी की किनारी (बॉर्डर/लेयर) पर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी अभिवादन ‘जय जोहार’ स्पष्ट अक्षरों में लिखा हुआ था, जो प्रदेश की सादगी, आत्मीयता और भाईचारे का सशक्त संदेश दे रहा था।

​अपने इस विशेष परिधान से मातृभूमि को नमन करते हुए लक्ष्मी वर्मा ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि वे उच्च सदन में केवल एक जनप्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की माटी और संस्कृति की सच्ची संवाहक के रूप में उपस्थित हुई हैं। ​इस गौरवपूर्ण अवसर पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए सांसद लक्ष्मी वर्मा ने कहा, “आज राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेना मेरे सार्वजनिक जीवन का अत्यंत भावुक और सर्वोच्च क्षण है। आज मैंने जो परिधान धारण किया है, वह मेरे लिए मात्र एक वस्त्र नहीं है, बल्कि यह मेरे प्रदेश की पहचान, हमारी गौरवशाली परंपरा और ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ का साक्षात आशीर्वाद है। मैं शीर्ष नेतृत्व, प्रदेश नेतृत्व और छत्तीसगढ़ की देवतुल्य जनता का हृदय से आभार व्यक्त करती हूं।

उन्होंने कहा, उच्च सदन में मेरा हर कदम और मेरी हर आवाज प्रदेश के सर्वांगीण विकास और हमारी सांस्कृतिक अस्मिता के संरक्षण के लिए पूर्णतः समर्पित होगी। लक्ष्मी वर्मा द्वारा उच्च सदन में छत्तीसगढ़ की संस्कृति के इस अनूठे और गौरवशाली प्रदर्शन की प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सराहना हो रही है। इस पहल ने छत्तीसगढ़ के प्रत्येक नागरिक को गौरवान्वित किया है।

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