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55 जिलों के विकास को मिलेगी रफ्तार, 6 नए कॉरिडोर से बढ़ेंगे निवेश और रोजगार के अवसर

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 भोपाल
 ग्वालियर और नागपुर शहरों को सिक्सलेन हाइवे से जोड़ने के लिए नए कारीडोर का सर्वे तेजी से चल रहा है. इस कॉरिडोर को केंद्र सरकार द्वारा सहमति मिलने के बाद सरकार द्वारा फिजिबिलिटी सर्वे कराया जा रहा है. जिसमें ये देखा जाएगा कि इस कॉरिडोर पर कैसा ट्रैफिक रहेगा. फिलहाल ये तय किया गया है कि 40 हजार करोड़ की लागत से 569 किमी लंबा सिक्सलेन हाइवे बनाया जाएगा, जो मध्य प्रदेश के 9 जिलों से गुजरेगा. इन सभी जिलों में सिक्सलेन कॉरिडोर के किनारे इंडस्ट्रियल क्लस्टर की स्थापना की जाएगी, जो इन जिलों के व्यवसाय में पंख लगाएंगे। 

 मध्य प्रदेश की सड़कों पर रफ्तार और विकास का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। सूबे के सभी 55 जिलों की तस्वीर बदलने और उनके बीच की दूरी को कम करने के लिए सरकार एक मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। राज्य में 6 नए इकोनॉमिक कॉरिडोर (आर्थिक गलियारे) तैयार किए जा रहे हैं, जो करीब 3,300 किलोमीटर लंबे होंगे। लगभग 36,483 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से बनने वाले इन एक्सप्रेस-वे ग्रिड का निर्माण कार्य साल 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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यह महापरियोजना न केवल सफर को आसान बनाएगी, बल्कि विंध्य, बुंदेलखंड, मालवा-निमाड़ और नर्मदा अंचल की आर्थिक रीढ़ को भी मजबूत करेगी। बालाघाट से बैतुल तक और बिलासपुर-रायपुर से होते हुए गुजरात सीमा तक कनेक्टिविटी का यह जाल प्रदेश के औद्योगिक और व्यापारिक विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

आइए जानते हैं कि मध्य प्रदेश को रफ्तार देने वाले ये छह इकोनॉमिक कॉरिडोर कौन से हैं और इनसे प्रदेश को क्या लाभ होगा:

1. मालवा-निमाड़ विकासपथ (कुल लंबाई: 450 किमी)
मालवा और निमाड़ अंचल को आर्थिक रूप से और समृद्ध बनाने के लिए इस कॉरिडोर को 7,972 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। इसके तहत गरोठ से उज्जैन के बीच 136 किलोमीटर और इंदौर से बुरहानपुर के बीच 215 किलोमीटर का रूट शामिल है। साल 2027 तक पूरा होने वाला यह मार्ग मंदसौर, उज्जैन, इंदौर, खंडवा और बुरहानपुर जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों को सीधे जोड़ेगा।

2. विंध्य एक्सप्रेस-वे (कुल लंबाई: 676 किमी)
करीब 3,809 करोड़ रुपये के बजट से बनने वाला यह एक्सप्रेस-वे राजधानी भोपाल से शुरू होकर प्रदेश के 10 जिलों से गुजरेगा। इसमें सागर, दमोह, कटनी और रीवा जैसे बड़े शहर शामिल हैं। इसके पूरी तरह चालू हो जाने के बाद भोपाल से रीवा और ऊर्जा धानी सिंगरौली तक का सफर बेहद आसान और बेहद कम समय में तय होने लगेगा।

3. बुंदेलखंड विकासपथ (कुल लंबाई: 330 किमी)
बुंदेलखंड क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए यह 330 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर बनाया जा रहा है। लगभग 3,357 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह पथ भोपाल, रायसेन, विदिशा, सागर और छतरपुर को आपस में जोड़ेगा, जिससे पर्यटन और व्यापार दोनों को रफ्तार मिलेगी।

4. अटल प्रगतिपथ (कुल लंबाई: 299 किमी)
चंबल अंचल के विकास को रफ्तार देने के लिए 299 किलोमीटर लंबे अटल प्रगतिपथ की रूपरेखा तैयार की गई है। यह कॉरिडोर दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से शुरू होकर बुंदेलखंड कॉरिडोर से जाकर मिल जाएगा। इससे श्योपुर, मुरैना और भिंड जैसे चंबल के जिलों को सीधा फायदा होगा और यहां नए उद्योगों के रास्ते खुलेंगे।

5. नर्मदा प्रगतिपथ (कुल लंबाई: 867 किमी)
नर्मदा नदी के समानांतर बनने वाला यह कॉरिडोर इस पूरी योजना का सबसे लंबा (867 किलोमीटर) हिस्सा है। यह मार्ग झाबुआ, धार, इंदौर, देवास, सीहोर, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर और डिंडौरी जैसे जिलों को एक सूत्र में पिरोएगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर को मध्य प्रदेश के रास्ते सीधे गुजरात की सीमाओं से जोड़ देगा।

6. मध्यभारत विकासपथ (कुल लंबाई: 746 किमी)
यह कॉरिडोर विशेष रूप से मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को दुनिया के सामने लाने के लिए डिजाइन किया गया है। 746 किलोमीटर लंबा यह मार्ग भीमबैठका, भोजपुर, सांची, उदयगिरी, चंदेरी, ओरछा और दतिया जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को जोड़ेगा। इसके अलावा, इस कॉरिडोर के जरिए मुरैना से लेकर बैतुल तक सीधी और निर्बाध कनेक्टिविटी मिल सकेगी।

 

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