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वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए अब नए नियम लागू, बढ़ी प्रक्रिया।

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 नई दिल्ली
देश के कई राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के बाद नए वोटर बनने के नियमों में भी परिवर्तन किया गया है। चुनाव आयोग के फॉर्म-6 में बदलाव किया गया है। इसके मुताबिक अब नए वोटर्स को वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए बताना होगा कि पिछले एसआईआर में उनके माता-पिता या फिर दादा-दादी का नाम दर्ज था या नहीं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक यह बदलाव अभी केवल ऑनलाइन फॉर्म में ही दिखाई दे रहा है। वहीं वेबसाइट से फॉर्म की हार्ड कॉपी डाउनलोड करने में यह ऑप्शन नहीं दिखाई देता है।

बता दें कि 10 राज्यों में एसआईआर के बाद कम से कम 5.58 करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कट गए हैं। ऐसे में उन परिवारों के नए मतदाताओं के सामने भी चुनौती खड़ी हो सकती है। हालांकि यह बात स्पष्ट नहीं की गई है कि अगर किसी के माता-पिता या फिर दादा-दादी का नाम एसआईआर के बाद वोटर लिस्ट में नहीं है तो उनके बच्चों या फिर पोते पोतियों का नाम शामिल किया जाएगा या नहीं ।

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बंगाल में एसआईआर को लेकर खूब हुआ विवाद
पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया चुनाव से ठीक पहले शुरू की गई थी। इसको लेकर खूब विवाद भी हुआ। अकेले पश्चिम बंगा में 27 लाख वोटरों का नाम वोटर लिस्ट से हटाया गया और वे विधानसभा चुनाव में वोट भी नहीं कर पाए।

चुनाव आयोग के ECINRT पोर्टल पर उपलब्ध डिक्लेरेशन फॉर्म 6 में 'J' और 'K' सेक्शन को जोड़ा गया है। इसी में आवेदक के माता पिता या फिर दादा दादी की डीटेल मांगी गई है। इसमें तीन ऑप्शन दिए गए हैं।

पहला विकल्प- मेरा नाम पिछळी एसआईआर मतदाता सूची में है
दूसरा विकल्प- मेरे माता-पिता/दादा-दादी का नाम पिछली एसआईआर की मतदाता सूची में है

तीसरा विकल्प- ना तो मेरा और ना ही मेरे पाता-पिता/दादा-दादी का नाम पिछली एसआईआर मतदाता सूची में था

तीसरा विकल्प चुनने पर क्या होगा?
अब अगर आवेदक पहला और दूसरा विकल्प चुनता है तो उससे संबंधित विधानसभा क्षेत्र, मतदान केंद्र और मतदाता सूची का सीरियल नंबर भी भरना होगा। अगर तीसरा विकल्प चुनता है तो आगे कोई डीटेल नहीं मांगी जाएगी। हालांकि इस कॉलम को अनिवार्य नहीं बताया गया है। यह भी नहीं बताया गया है कि तीसरा विकल्प चुनने पर आगे क्या होगा।

यह विकल्प उन राज्यों के ऑनलाइन पोर्टल पर है जिनमें 2025-26 में एसआईआर किया गया है। हालांकि बिहार को इससे अलग रखा गया है। बिहार में सबसे पहले एसआईआर करवाया गया था। वहीं असम में एसआईआर नहीं करवाया गया है। बता दें कि पिछले साल जून में एसआईआर शुरू होने के बाद से फॉर्म- 6 में कोई सुधार नहीं किया गया है।

चुनाव आयोग नहीं बदल सकता है फॉर्म-6
केंद्र सरकार के पास रिप्रजंटेशन ऑफ द पीपल ऐक्ट 1950 सेक्शन 28 के तहत नियमों में बदलाव करने का अधिकार है। हालांकि संविधान के आर्टिकल 326 के मुताबिक भारत में रहने वाले वयस्क को वोटर लिस्ट में नाम शामिल करवाने का अधिकार है, जब तक कि उसे किसी वजह से अयोग्य ना ठहराया गया हो। सेक्शन 28 में कहा गया है कि चुनाव आयोग से सलाह करने के बाद केंद्र सरकार ऑफिशल गजेट में नोटिफिकेशन जारी करके नियम बना सकती है।

एक अधिकारी ने कहा कि फॉर्म-6 में बदलाव करने से पहले कानून मंत्रालय का नोटिफिकेशन जारी करना जरूरी है। यह अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है। उन्होंने कहा चुनाव आयोग अपने मन से फॉर्म में एक कॉमा भी नहीं लगा सकता है। वहीं 2021 में संसद में कानून में संशोधन करके चुनाव आयोग को मतदाताओं के आधार कार्ड लेने का अधिकार दिया गया था। 17 फरवरी 2022 को इसका नोटिफिकेशन भी जारी किया गया था।

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