Home ट्रेंडिंग बिहार के 211 डिग्री कॉलेजों में 2451 सहायक प्राध्यापकों का चयन, 1980...

बिहार के 211 डिग्री कॉलेजों में 2451 सहायक प्राध्यापकों का चयन, 1980 बिहारी अभ्यर्थी

2
0
Jeevan Ayurveda

पटना
 बिहार के नवसृजित 211 डिग्री कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है।

इन कॉलेजों में चयनित 2,451 सहायक प्राध्यापकों में 1,980 बिहार के निवासी हैं। यानी कुल चयनित अभ्यर्थियों में 80 प्रतिशत से अधिक बिहार के हैं। यह चयन अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है।

Ad

बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के अध्यक्ष प्रो. गिरीश कुमार चौधरी ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय स्तर पर चयन प्रक्रिया होने के बावजूद बड़ी संख्या में बिहार के अभ्यर्थियों का चयन हुआ है।  

30 दिनों में पूरी हुई नियुक्ति प्रक्रिया
प्रो. चौधरी ने बताया कि नवसृजित डिग्री कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से जुलाई के प्रथम सप्ताह में शुरू की गई थी।

इसके लिए कुल 6,939 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। साक्षात्कार के बाद 2,451 अभ्यर्थियों को सहायक प्राध्यापक के पद पर संविदा के आधार पर नियुक्ति के लिए चयनित किया गया।

साक्षात्कार का परिणाम एक अगस्त को जारी किया गया। आयोग के अध्यक्ष के अनुसार विज्ञापन जारी करने से लेकर अंतिम मेधा सूची के प्रकाशन तक की पूरी प्रक्रिया करीब 30 दिनों में पूरी कर ली गई। उन्होंने इसे आयोग की ओर से कम समय में पूरी की गई महत्वपूर्ण नियुक्ति प्रक्रिया बताया।

आरक्षण के कारण बिहार के अभ्यर्थियों को मिला लाभ
प्रो. चौधरी ने नियुक्ति में आरक्षण व्यवस्था को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि बिहार में लागू आरक्षण नीति के तहत पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए कुल 60 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। इन आरक्षित सीटों का लाभ केवल बिहार के निवासी अभ्यर्थियों को मिलता है।

इसके अलावा 40 प्रतिशत अनारक्षित सीटों में भी विभिन्न श्रेणियों के लिए क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान है। महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत, दिव्यांगजनों के लिए चार प्रतिशत और स्वतंत्रता सेनानियों के स्वजन के लिए दो प्रतिशत आरक्षण निर्धारित है। इन प्रावधानों का लाभ भी बिहार के पात्र अभ्यर्थियों को मिलता है।

आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान आरक्षण प्रावधानों को देखते हुए नियमित चयन प्रक्रिया में भी कम-से-कम 76 प्रतिशत चयनित अभ्यर्थियों के बिहार के निवासी ही होंगे।
तीन मामलों में दस्तावेज सत्यापन के बाद कार्रवाई

नियुक्ति प्रक्रिया में सामने आए तीन मामलों को लेकर भी प्रो. चौधरी ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि राजेश कुमार यादव का योगदान ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में दस्तावेज सत्यापन के दौरान स्वीकार नहीं किया गया। सत्यापन के दौरान आरक्षण श्रेणी से संबंधित गलत प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किए जाने की बात सामने आई थी।

इसी तरह हिंदी विषय के लिए चयनित हेमा कुमारी का योगदान भी दस्तावेज सत्यापन के दौरान अस्वीकार कर दिया गया।

तीसरे मामले में अर्थशास्त्र विषय में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की श्रेणी में मेरिट के आधार पर 16 महिला अभ्यर्थियों का चयन हुआ था।

इसलिए सभी 16 महिला अभ्यर्थियों को मेरिट सूची में शामिल किया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि इसमें नियमों के अनुरूप मेरिट के आधार पर चयन किया गया है।

गलत दस्तावेज मिले तो नियुक्ति होगी रद
प्रो. गिरीश कुमार चौधरी ने कहा कि चयन प्रक्रिया में दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण चरण है। यदि किसी अभ्यर्थी द्वारा गलत सूचना अथवा गलत दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने की जानकारी नियुक्ति के बाद भी सामने आती है तो उसकी नियुक्ति तत्काल रद कर दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है और किसी भी स्तर पर गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेज मिलने पर संबंधित अभ्यर्थी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here