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बेड से लेकर दरवाजे तक, इन जगहों पर बैठकर खाना न खाएं, वास्तु में माना गया है अशुभ

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वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर केवल रहने का स्थान नहीं है, बल्कि यह हमारी ऊर्जा, स्वास्थ्य और खुशहाली का केंद्र होता है. दिनभर की भागदौड़ के बाद जब हम भोजन करते हैं, तो वह केवल हमारे शरीर को पोषण ही नहीं देता, बल्कि हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है. लेकिन अक्सर अनजाने में हम घर के किसी भी कोने जैसे बेड पर बैठकर या दरवाजे की चौखट पर, खाना खाने लगते हैं.

वास्तु और ज्योतिष में भोजन करने के स्थान और दिशा का सीधा संबंध हमारी सेहत, मानसिक शांति और आर्थिक स्थिति (मां लक्ष्मी की कृपा) से माना गया है. गलत जगह बैठकर भोजन करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा और बीमारियां दस्तक देने लगती हैं. आइए जानते हैं कि वास्तु के अनुसार घर में किन-किन जगहों पर बैठकर खाना खाने से सख्त परहेज करना चाहिए.

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बिस्तर या बेड पर
वास्तु और शास्त्र दोनों में बिस्तर पर बैठकर खाना खाने को सख्त मना किया गया है. ऐसा करने से राहु का अशुभ प्रभाव बढ़ता है, व्यक्ति कर्ज में डूब सकता है, नींद से जुड़ी समस्याएं होती हैं और घर की बरकत रुक जाती है.

टूटे-फूटे या गंदे बर्तनों और हाथों में रखकर
प्लेट को हाथ में पकड़कर या फिर टूटे-फूटे व चटके हुए बर्तनों में खाना नहीं खाना चाहिए. हाथ में थाली रखकर खाने से दरिद्रता आती है और टूटे बर्तनों में खाने से घर में कलह और नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है.

रसोई घर के बिल्कुल दरवाजे या मुख्य द्वार पर
घर के मुख्य द्वार (Main Door) पर या चौखट पर बैठकर भोजन करना बेहद अशुभ माना जाता है. मुख्य द्वार से ऊर्जा का प्रवेश होता है; वहां बैठकर खाने से घर की लक्ष्मी रुष्ट होती हैं और धन की हानि होती है.

अंधेरे या धुंधली रोशनी वाली जगह पर
जहां रोशनी कम हो या अंधेरा हो, वहां बैठकर भोजन नहीं करना चाहिए. इससे पाचन तंत्र खराब होता है और मन में नकारात्मक विचार आते हैं.

बाथरूम या शौचालय के पास
शौचालय से हमेशा नकारात्मक ऊर्जा निकलती है. इसके आसपास बैठकर खाना खाने से भोजन की पवित्रता नष्ट होती है. इससे कई प्रकार की शारीरिक बीमारियां और इंफेक्शन होने का खतरा रहता है.

वास्तु के अनुसार भोजन करने के सही नियम
– भोजन करते समय आपका मुख हमेशा पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए। इससे आयु और स्वास्थ्य बढ़ता है. दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से बचना चाहिए.

– यदि संभव हो तो रसोई घर (Kitchen) में बैठकर ही भोजन करें. इससे राहु के दोष शांत होते हैं. इसके अलावा डाइनिंग टेबल पर साफ जगह बैठकर खाएं.

– भोजन शुरू करने से पहले हाथ-पैर अच्छे से धोएं और अन्न देवता का धन्यवाद करें.

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