Home छत्तीसगढ़ जेल में बंद CRPF जवान की बर्खास्तगी पर हाईकोर्ट का फैसला, कार्रवाई...

जेल में बंद CRPF जवान की बर्खास्तगी पर हाईकोर्ट का फैसला, कार्रवाई को बताया अवैध

4
0
Jeevan Ayurveda

बिलासपुर.

जेल में बंद रहने के दौरान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के एक इंस्पेक्टर के खिलाफ उसकी अनुपस्थिति में विभागीय जांच कर बर्खास्त करने की कार्रवाई को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन माना है.

Ad

जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने बर्खास्तगी और अपील खारिज करने के दोनों आदेश निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता को सेवा में वापस लेने का निर्देश दिया है. हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसे पिछला वेतन नहीं मिलेगा. संबंधित विभाग को नियमानुसार नए सिरे से विभागीय कार्रवाई करने की स्वतंत्रता भी दी गई है. मणिपुर के निवासी याचिकाकर्ता वाई.के. सोलोमन सीआरपीएफ में इंस्पेक्टर के पद पर पदस्थ थे. वह वर्ष 2015 में अंबिकापुर में प्रशिक्षण ले रहे थे. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शक्ति राज सिन्हा ने बताया कि, इस दौरान 2 अगस्त 2015 को अग्रसेन चौक पर संजय सिंह के साथ मारपीट की घटना हुई थी.

बाद में इलाज के दौरान संजय सिंह की मृत्यु हो गई. इस मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ हत्या सहित भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया और 8 अक्टूबर 2016 को उनकी गिरफ्तारी हुई. इसके बाद सीआरपीएफ अधिकारियों ने विभागीय जांच शुरू कर 3 सितंबर 2018 को सेवा से बर्खास्त कर दिया, वहीं आपराधिक मामले में अंबिकापुर के तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश ने 1 नवंबर 2021 को संदेह का लाभ देते हुए उन्हें बरी कर दिया. इसके बाद उन्होंने बरी होने के आधार पर बहाली की मांग की, लेकिन 11 मई 2022 को विभाग ने उनकी अपील खारिज कर दी. हाईकोर्ट ने सुनवाई में पाया कि विभागीय जांच के दौरान याचिकाकर्ता केंद्रीय जेल अंबिकापुर में विचाराधीन बंदी के रूप में निरुद्ध थे. उन्हें 23 जुलाई 2018 को जेल में नोटिस दिया गया था, जिसके जवाब में उन्होंने स्पष्ट किया था कि जेल में बंद होने के कारण वे विभागीय जांच में उपस्थित होकर अपना बचाव नहीं कर सकते. उन्होंने आपराधिक मुकदमे का अंतिम फैसला आने तक जांच स्थगित रखने का अनुरोध भी किया था. इसके बावजूद अधिकारियों ने उनकी अनुपस्थिति में जांच पूरी कर यह मान लिया कि, उनके पास बचाव में कोई साक्ष्य या गवाह नहीं हैं.

कोर्ट ने कहा कि सीआरपीएफ के स्थायी आदेश क्रमांक 20/2001 के पैरा 14 में भी कर्मचारी को बचाव का उचित अवसर देने का प्रावधान है. जेल में बंद होने की जानकारी और जांच स्थगित करने के अनुरोध के बावजूद सुनवाई का अवसर दिए बिना बर्खास्तगी का आदेश जारी करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है. एकलपीठ ने 3 सितंबर 2018 का बर्खास्तगी आदेश और 11 मई 2022 का अपील खारिज करने संबंधी आदेश निरस्त कर दिया . कोर्ट ने अधिकारियों को याचिकाकर्ता को बिना पिछले वेतन के सेवा में वापस लेने का निर्देश दिया है. साथ ही स्पष्ट किया कि विभाग चाहे तो कानून के अनुसार उनके विरुद्ध नए सिरे से विभागीय कार्रवाई कर सकता है. कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी को आरोपों का जवाब देने और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिए बिना की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई कानूनी रूप से कायम नहीं रह सकती. इस आधार पर याचिका स्वीकार कर ली गई.

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here