भोपाल
भारत सरकार ने अपने कर्मचारियों का महंगाई भत्ता और पेंशनरों की महंगाई राहत तीन प्रतिशत बढ़ाकर 63 प्रतिशत कर दी है। वहीं, प्रदेश के 7 लाख कर्मचारियों और चार लाख से अधिक पेंशनरों को अभी 58 प्रतिशत की दर से भत्ता और राहत मिल रही है।
उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की कि प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों को केंद्र द्वारा घोषित तिथि से ही बढ़े हुए भत्ते और राहत का लाभ दिया जाए।
केंद्र सरकार ने बुधवार को केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 3% बढ़ाकर 63% कर दिया है। इसके बाद मध्यप्रदेश के कर्मचारी और पेंशनर्स केंद्र से 5 प्रतिशत अंक पीछे हो गए हैं। प्रदेश में फिलहाल 58% डीए और डीआर मिल रही है।
राज्य सरकार यदि जनवरी 2026 से लंबित 2% और जुलाई 2026 से 3% बढ़ोतरी देने का ऐलान करती है, तो प्रथम श्रेणी के अधिकारियों को हर महीने 7,500 रुपए तक या इससे अधिक का फायदा हो सकता है। इस बढ़ोतरी से सरकार पर करीब 1,202 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार आने का अनुमान है।
केंद्र और एमपी के डीए में 5 प्रतिशत अंक का अंतर
केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2026 से केंद्रीय कर्मचारियों के डीए में 3% बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। इसके बाद केंद्रीय कर्मचारियों का कुल डीए 63% हो गया है। दूसरी ओर, मध्यप्रदेश में कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के आधार पर 58% डीए और पेंशनर्स को 58% महंगाई राहत मिल रही है।
कर्मचारियों को घोषणा का इंतजार
प्रदेश के कर्मचारी जनवरी 2026 से लंबित 2% बढ़ोतरी और जुलाई 2026 से देय 3% बढ़ोतरी की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि राज्य सरकार दोनों अवधियों की बढ़ोतरी को मिलाकर कुल 5% का लाभ दे।
5% बढ़ोतरी से सरकार पर आएगा 1,202 करोड़ रुपए का भार
कर्मचारी संगठनों के आकलन के मुताबिक, जनवरी से जुलाई 2026 तक 2% डीए और डीआर देने पर सरकार पर करीब 450 करोड़ रुपए का खर्च आएगा।
वहीं, जुलाई से अक्टूबर 2026 तक 5% की दर से भुगतान करने पर करीब 752 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च अनुमानित है। इस तरह जनवरी से अक्टूबर तक कुल भुगतान का अनुमानित भार 1,202 करोड़ रुपए बताया गया है।
4 नवंबर को फिर आंदोलन की तैयारी
डीए और डीआर में बढ़ोतरी की मांग को लेकर मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने 22 अक्टूबर को गवर्नमेंट प्रेस के पास प्रदर्शन किया था। इसमें करीब 12 लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स को महंगाई भत्ते का लाभ देने की मांग उठाई गई।
अब लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ और अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने 4 नवंबर को सतपुड़ा भवन के सामने ध्यानाकर्षण प्रदर्शन करने का फैसला किया है। संगठनों का कहना है कि केंद्र और राज्य के डीए में अंतर बढ़ने से कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
पुराने एरियर का भुगतान भी अटका
लिपिक वर्गीय कर्मचारी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष एमपी द्विवेदी और प्रदेश उपाध्यक्ष, शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने लंबित 2% महंगाई भत्ते के भुगतान की मांग उठाई है। उनका कहना है कि पहले घोषित 3% डीए के एरियर का भुगतान भी कई जिलों में नहीं हुआ है।
पेंशनर्स एसोसिएशन ने भी लिखा सीएम को पत्र
पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आमोद सक्सेना ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर 1 जनवरी 2026 से लंबित 2% और 1 जुलाई 2026 से 3% महंगाई राहत (कुल 5%) के भुगतान आदेश जल्द जारी करने की मांग की है।
एसोसिएशन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी ने कहा- महंगाई राहत बढ़ती महंगाई के असर को कम करने का आर्थिक सहारा है। भोपाल जिला अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने वरिष्ठ नागरिक पेंशनरों को राहत देने के लिए शीघ्र निर्णय लेने की उम्मीद जताई।









