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चेन्नई से निकली हरित क्रांति की रेल: ‘नमो ग्रीन रेल’ का पहला रैक तैयार

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नई दिल्ली

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यह बात है साल 2023 की। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्य सभा में हाइड्रोजन ट्रेन भारत में भी चलाने की घोषणा की थी। इस बात को दो साल ही हुए हैं और रेलवे ने देशी संसाधनों से अपना पहला हाइड्रोजन ट्रेन तैयार कर लिया है। इसे नमो ग्रीन रेल नाम दिया गया है। रेलवे के चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री या आईसीएफ से परसों यानी रविवार को रात में इसे फैक्ट्री के बगल में स्थित अन्नानगर यार्ड में भेज दिया गया है। अब रेलवे के रिसर्च आर्म आरडीएसओ की निगरानी में इसका ऑसिलेशन या दोलन लेखी ट्रायल होगा।

कैसे बनाया गया है ट्रेन
इस प्रोजेक्ट से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस ट्रेन में कुल 10 डिब्बे हैं, जिनमें दो इंजन हैं। इंजनों की व्यवस्था आगे और पीछे की गई है। इस ट्रेन को 'नमो ग्रीन रेल' नाम दिया गया है। आईसीएफ ने इस ट्रेन को 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने के लिए डिजाइन किया है। अब तो फील्ड ट्रायल में ही पता चलेगा कि ट्रेन किसी स्पीड पर खरी उतरती है। इस ट्रेन के इंजन पर 'नमो ग्रीन रेल' लिखा गया है। मतलब कि हाइड्रोजन ट्रेन को इसी नाम से जाना जाएगा।

डीजल इंजन को बदला गया हाइड्रोजन इंजन में
हाइड्रोजन ट्रेन के इस प्रोजेक्ट के लिए रेलवे ने अपने 1600 हार्सपावर के दो डीजल इंजनों को 1200 हार्सपावर के हाइड्रोजन इंजन में बदला है। यह काम आईसीएफ, चेन्नई में ही हुआ है। इन इंजनों में हाइड्रोजन फ्यूलिंग के लिए हरियाणा के जिंद में फ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है। वहां ही करीब 3,000 किलो हाइड्रोजन के स्टोरेज की भी व्यवस्था है। इस ट्रेन में एक बार में करीब 1200 पैसेंजर्स यात्रा कर सकेंगे।

अब होगा ऑसीलेशन ट्रायल
सूत्रों ने बताया कि चेन्नई के अन्नानगर यार्ड से नमो ग्रीन रेल को उत्तर रेलवे के पास भेजा जाएगा। वहां आरडीएसओ के सहयोग से इसका हरियाणा के जिंद और सोनीपत के बीच ऑसीलेशन ट्रायल किया जाएगा। इस ट्रायल के दौरान ट्रेन में उतना ही वजन रख कर दौड़ाया जाएगा, जितने वजन के पैसेंजर्स उसमें चढ़ेंगे। वजन डालने के लिए प्लस्टिक के पीपे में मेटल पाउडर डाल कर 50-50 किलो का वजन बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि रेल ऑपरेशन में हाइड्रोजन को उपलब्ध फ्यूल में से सबसे स्वच्छ इंधन माना जाता है। इससे जीरो इमिशन होता है। जबकि जीवाश्म इंधन के बर्न होने से वातावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन होता है जो कि वातावरण के लिए घातक है।

हाइड्रोजन सेल से चलेगी ट्रेन
इस टेन में जो आगे और पीछे एक एक पावर कार बनाया गया है, उनमें 220 किलो हाइड्रोजन के स्टोर करने की क्षमता होगी। इन पावर कार में हाइड्रोजन सेल विशेष रूप से डिजाइन किए गए सिलेंडरों में 350 बार प्रेशर पर भरा जाएगा। आप जान लें कि इस ट्रेन में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के रिएक्शन से बिजली पैदा होती है। इसमें सिर्फ पानी (H₂O) और ऊर्जा उत्पन्न होती है, जो इसे पर्यावरण के लिए बहुत ही साफ और प्रदूषण-मुक्त बनाती है।

दुनिया में और कहां चलती है हाइड्रोजन ट्रेन
दुनिया भर में जर्मनी पहला देश है, जहां हाइड्रोजन ट्रेन चली है। वहां 2022 में ही ऐसा हो चुका है। वहां कामर्शियल सर्विस के लिए हाइड्रोजन ट्रेन चलाया जा रहा है। जर्मनी की हाइड्रोजन ट्रेन को अलस्टॉम ने बनाया है। इसके एक साल बाद ही फ्रांस ने भी हाइड्रोजन ट्रेन की दिशा में कदम बढ़ा दिया। गौरतलब है कि अलस्टॉम का हेडक्वार्टर फ्रांस में ही है।

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