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दुर्ग बना जल संरक्षण का मॉडल, 16 करोड़ लीटर जल भंडारण क्षमता के विकास से बढ़ी तैयारी

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दुर्ग.

मोर गांव मोर पानी अभियान के तहत जिले में अब तक लगभग 15.96 करोड़ लीटर जल भंडारण क्षमता विकसित की जा चुकी है। पिछले कुछ दिनों में हुई अच्छी वर्षा के कारण अभियान के तहत निर्मित वॉटर एब्जॉर्शन ट्रेंच, अमृत सरोवर, आजीविका डबरी, नवा तरिया एवं अन्य जल संरक्षण संरचनाएं तेजी से वर्षा जल से भर रही हैं। गांव-गांव में ये जल संरक्षण संरचनाएं लबालब भर रही हैं।

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कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण करना नहीं, बल्कि उन्हें ग्रामीण समृद्धि का स्थायी आधार बनाना है। अच्छी वर्षा के साथ इन संरचनाओं के भरने से यह स्पष्ट हो गया है कि यह अभियान जल संरक्षण के साथ-साथ रोजगार सृजन, कृषि उत्पादकता में वृद्धि तथा ग्रामीण आजीविका सशक्तीकरण की दिशा में प्रभावी परिणाम दे रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ने के साथ- साथ कृषि, सिंचाई, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं अन्य आजीविका गतिविधियों को नई मजबूती मिल रही है।

उन्होंने बताया कि जिले में अब तक लगभग 15.96 करोड़ लीटर जल भंडारण क्षमता विकसित की जा चुकी है। इसके परिणामस्वरूप वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो रहा है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत दुर्ग श्री बजरंग कुमार दुबे के मार्गदर्शन में एक ही वित्तीय वर्ष में जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त हुई हैं। इस अवधि में 55,965 वॉटर एब्जॉर्शन ट्रेंच, 15 परकोलेशन पॉन्ड, 834 रिचार्ज पिट, 1,324 रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं, 9,663 सोख्ता गड्ढे, 123 तालाब, 20,518 कंटूर ट्रेंच, 26 चेक डैम तथा 28 बोरवेल रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया गया।

30 आजीविका डबरियां और 112 नवा तरिया
जिले में निर्मित 30 आजीविका डबरियां प्रभावी रूप से वर्षा जल का संचयन कर रही हैं। वहीं नवा तरिया-आय के जरिया पहल के अंतर्गत निर्मित 112 डबरियां एवं तालाब भी वर्षा जल से लबालब भरने लगे हैं। इन संरचनाओं से वर्षभर मत्स्य पालन, सिंचाई, बागवानी तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों के लिए स्थायी जल स्रोत उपलब्ध होंगे।

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